
चाहे आप एक ब्यस्त माँ-बाप हो या होनहार-परिश्रमी विद्यार्थी या हो ऊँचे स्तर के पदाधिकारी
आपको अपनी शरीर की ऊर्जा का स्तर आदर्श रखना होता है
ताकि ऐसा न हो जब आप को ऊर्जा की अत्यधिक जरूरत हो तभी आप उसे खो बैठे |
मानव शरीर के अन्दर ही ऊर्जा बनाने और बचाने की प्रणाली मौजूद होती है |
मसलन हम सोते है,खाते है,ब्यायाम करते है ,पीते है ,ये सब ऊर्जा पाने के लिए |
पर जल्दी जल्दी थकान का अनुभव करने का मतलब है की शरीर के अन्दर कुछ भयंकर कमी है जिसका पता लगाना बहूत ही महत्वपूर्ण है | अधिकांश लोगों द्वारा अपने आहार में सेहत की जगह स्वाद को ज्यादा महत्व देना युवावस्था के तुरंत बाद ही उनके शरीर पर भारी पड़ने लगता है |
40 साल के बाद ही विभिन्न प्रकार के बीमारियों का उभरना इस तथ्य की ओर ध्यान खिचता है की ब्यक्ति विशेष ने स्वास्थ्य रहने के नियमों का समय के साथ इमानदारी से पालन नहीं किया है |
स्वास्थ्य का सीधा सा गणित है की हम जैसा और जो कुछ भी खायेंगे उसका परिणाम शरीर को भुगतना ही पडेगा |
यदि अपवाद स्वरुप अनुवांशिक कारणों को छोड़ दिया जाये तो जावानी का खाया, बुढापा में रंग दिखाता है |
हम में से कई लोग खुद को कैफीन,टैनिन,अल्कोहल का लती बना लेते है |
इससे हमें उत्तेजना मिलती है और हम सक्रीय हो जाते है ,बिना यह चिंता किए की इससे हमारे शरीर पर व नींद लेने व ऊर्जा बचाने पर क्या असर पडेगा ? और यदि जवानी आपके पिज्जा---------वर्गर---------------और प्रक्रिया वाले भोजन के स्वाद में मस्त रहें तो बुढ़ापा बदरंग होगा ही ,इसमें संदेह कहाँ है ?
ऐसी आदतें सेहत विरोधी है , यह शरीर में ऊर्जा का स्तर गिरा देती है |
फिर शरीर और ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा की मांग करता है |
यदि आपने जवानी के समय में स्वाद के कारण अनाप-शनाप भोजन करके पांच हाथ के शरीर के वजाय दो इंच जीभ की ओर ज्यादा ध्यान दिया है --- जिसके कारण आप अस्वस्थ्य महसूस कर रहे है और कायाकल्प करना चाहते है |
तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है |
अगर आप में दृढ शक्ति है ,यदि आप गलती महसूस करके भूल सुधारने के लिए तैयार है |
केवल आपको भोजनचर्या में सुधार लाना होगा और ऐसे पौष्टिक पूरक को शामिल करना होगा जिससे उम्र बढ़ने पर गठिया, मोटापा, पीठ में दर्द, मस्तिस्क में शिथिलता, मोतियाबिंद व ह्रदय रोग पीछे न लगें और बुढापा कराहते हुए न बीते और जीवन के अंतिम दिनों में भी बहूत तकलीफ ना हो |
कुछ ऐसे ही सुझाव इस रचना में हम रखने जा रहे है जिससे की वृधावस्था सुख से बीते और युवा के समान ही हम इस संसार से विदा ले सकें |
बढती उम्र में भी आप स्वास्थ्य और जवान रह सकते है बस आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत है ---------
विटामिन - इ ---- नवयुवक में रोग के प्रतिरोध करने की क्षमता सबसे अधिक रहती है पर जैसे-जैसे उम्र बढती है यह क्षमता कम होती जाती है |
विटामिन -इ विशेषकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में सहायक होते है |
वृद्ध लोगों को यदि इस विटामिन की पर्याप्त मात्र मे दे दी जाए तो उनकी प्रतिरोधक शक्ति नवयुवक के सामान हो जाएगी |
विटामिन- बी 6 --- शोधों के द्वारा ज्ञात हुआ है की बढ़ी हुई उम्र में विटामिन बी 6 की कमी से प्रतिरोधक क्षमता में तेजी से गिरावट आ जाती है
और यदि इसकी समुचित मात्रा दिया जाये तो न केवल प्रतिरोधक शक्ति में गिरावट कम होगी बल्कि बढ़ोतरी होती रहेगी |
अनाक्सिकारक पदार्थ --------- कोशिकाओं में भारी मात्रा में तहस-नहस होते रहना ही बुढापे की ओर अग्रसर होने का एक मात्र कारण है |
भाग्यवश प्रकृति में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ विद्यमान है जो की अनियंत्रित ऑक्सीकरण का विरोध करते है |
और जो शारीर में free redical ( मुक्त अभिकारक ) के द्वारा सजीव कोशिकाओं को भारी मात्रा में क्षतिग्रस्त होना भी बुढापे के संकेत है |
इनमे सबसे शक्तिशाली अनाक्सिकारक पदार्थ विटामिन - इ है |
विटा कैरोटिन जो हरे सब्जियां, पपीता,पीले फल इत्यादि में होता है जो विटामिन ए का प्रतिरूप है |
विटामिन- सी ----- तीसरा मुख्य पदार्थ है जो एस्कारविक अम्ल है जो रसदार फल जैसे निम्बू, मौसमी , संतरा ,अमरुद ,सब्जी जैसे हरे मिर्च ,आंवला , बंद गोभी में पाया जाता है यदि हम इस पदार्थ को लेते है तो कोशिकाओं की क्षतिग्रस्तता रुकी रहेगी और बुढापे देर से आयेगा |
इस कारण यह उचित होगा की 40 -42 वर्ष की आयु के बाद से ही इन खाद्य पदार्थ का अधिकाधिक मात्रा में लेना शुरू कर दें ताकि बुढापे की कगार पर पहुँचने से पूर्व हमारी प्रतिरोधक प्रणाली चुस्त-दुरुस्त रहें |
प्रस्तुत रचना में आहार में छुपे गुणों को आपके समक्ष रखकर यह बताने की चेष्टा की जा रही है की सर्व सुलभ खाद्य पदार्थ भी सेहत को बुढापे तक बरकरार रख सकते है ,और शारीर को बुढ़ाने की क्रिया को धीमा करके द्रिघायु प्रदान कर सकते है |
साथ ही शारीर के अन्दर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती देकर रोगों से दूर रख सकते है |
एलो वेरा जेल जिसका उपयोग मनुष्य हजारों साल पहले से करता आ रहा है |
इसके गुण के बारे में रामायण,महाभारत ,बाइबल ,चरक संहिता,और भी कई ग्रंथों में लिखा हुआ है |
सिकंदर महान ने एक पूरी युद्ध इस पौधों के लिए सुमात्रा द्वीप पर लड़ा था
जिससे वो अपने घायल सैनिक का इलाज किया करते थे |
एलो पौधे को संस्कृत में " कुमारी " कहते है , जिसका अर्थ है कुवांरी या युवती |
यह सावित करता है की इस पौधे में बुढापा प्रतिरोधी तत्व है जिनके उपयोग करने से मनुष्य लम्बे समय तक अन्दुरुनी और बाहरी तौर पर जवान बना रह सकता है | आयुर्वेद में इस के उपयोगों का वर्णन 4000 वर्ष पहले हुआ था |
भारत के बिभिन्न भागों में इसके भिन्न-भिन्न नाम है ----जैसे कोरफेड , कलामांडा , चित्रकुमारी , घृतकुमारी , गृहकन्या , ग्वारपाठा , कारगंधक , लालेसरा , कुमार पट्टू इत्यादि |
अपने बहूत से फायदों के वजह से लोग एलो को चमत्कारी पौधा कहा जाता है |
आज के युग में यह जेल मानव जाती के लिए अमृत के सामान है | वर्तमान समय में धरती पर तमाम उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ पूरकों में से एलो जेल को एक माना जाता है |
एलो जेल में 18 एमिनो एसिड ,12 विटामिन (विटामिन ए , बी -1 , बी -3 , बी -5 , बी -6 , बी-12 , सी , इ , के और कोलाइन तथा फॉलिक एसिड ) और 20 खनिज पाए जाते है | इसके आलावा भी कई अन्य अनजाने यौगिक है जो शारीर के लिए उपयुक्त है | प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण यह जैविक रूप से शारीर के लिए एकदम ठीक है ,इसका कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है
और इसके सेवन से कोई इसका आदी नहीं होता | संक्षेप में , एलो जेल इस धरती का चमत्कार है |
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ताऊ .इन

चुकी मैं विहार का निवाशी हूँ ----- पूर्वोत्तर रेलवे जो विहार की ओर प्रस्थान करती है ------खासकर कोई पर्व के समय नयी देल्ली रेलवे स्टेसन का नज़ारा कुछ ऐसा ही प्रतीत होता ----जैसे की कुम्भ का मेला लगा हो | खचाखच यात्रियों से भरी होती है ------ पुलिस प्रशाशन का समुचित व्यवस्था किया जाता है ----ताकि यात्रिओं के साथ किसी भी प्रकार के कोई घटना या दुर्घटना न हो जाय | एक बार तो मुझे भी इस भीड़ का हिंस्सा बनना पडा था -----स्थान आरक्षित भी करवाया पर ऐसे बक्त पर कोई लाभ नहीं होता है ---कई ऐसे लोग मिले ,जिनके पास आरक्षित स्थान के बाबजूद उन्हें अपना स्थान नहीं मिल पाया था ------उनमें से एक मैं भी था |
दिल्ली से विहार की ओर जाने वालों के लिए त्यौहार के समय ये नज़ारा आम है | भाग्य आपका साथ दे दिया तो ही स्थान पर बैठने का अवसर मिल सकता वरना आपका कुछ नहीं हो सकता, ऊपर वाले ही कुछ करेंगे |
"रेलगाड़ी की जेनरल बोगी
पता नहीं आपने भोगी की नहीं भोगी
एक बार मुझे करनी पड़ी यात्रा
स्टेशन पर देखकर सवारियों की मात्रा
मुझे तो पसीने छूटने लगी |"
"इतने में एक कुली आया
और जोर से चिल्लाया
उसने पूछा---जाओगे
मैंने कहा --पहुँचाओगे
उसने कहा- बड़े बड़ों को पहुंचाया हूँ
आपको भी पहुंचा दूंगा
पर रुपैये पुरे पचास लूंगा"
"मैंने कहा पचास रुपैये
उसने कहा हाँ बाबूजी
बीस रूपैये आपके और
बाकी सामान के
मैंने कहा - भाई मेरे पास सामान नहीं है
उसने कहा - यही तो गम है-----
बाबूजी क्या आप किसी सामान से कम है ?"
"देखो पहले आपको उठाना पडेगा
फिर कंधे पर चढ़ाना पडेगा
और उसके बाद
जोर से धक्का देकर
अन्दर को पहुंचाना पडेगा"
"मैंने कहा चलो ठीक है
उसने बिलकुल वैसा ही किया
और मुझे सामान और सूटकेस की तरह
ट्रेन के अन्दर फेक दिया |"
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ताऊ .इन
होली की यह रंगारंग त्यौहार पर आप सबको बहूत बहूत शुभकामनाएं |
सोचा क्यूँ नहीं कुछ आज खान-पान से सम्बंधित लेख लिखा जाय |
चुकी यह त्यौहार तो विशेषकर खाने पिने के लिए होता है |
इस त्यौहार की अलग ही पहचान है |
आप कोशिस करें रंग और गुलाल जो प्रयोग करें वो रसायन रहित हो
ताकि आपकी होली आपके त्वचा को दुष्प्रभाव ना करें |
क्यूंकि बाज़ार में आजकल रंगों की भरमार है और खासकर रासायनिक रंग |
होली जरूर खेले ,मन से खेले लेकिन
जरूर ध्यान रखे की कहीं ऐसी वैसी रंग आपके होली को बेरंग न कर दे |
और दूसरी बात रहा खाने की ,तो आज हमारे यहाँ भी बहूत तरह के ब्यंजन बन रहा है |
मिठाई भी है और साथ में चुकी हम सुद्ध शाकाहारी है तो यहाँ
पनीर की सब्जी, साग और ,कुछ हरी सब्जी बन रही है |
वायु प्रदुषण एवं जल प्रदुषण के विषय में तो अनेक वर्षों से बहूत कुछ सूना जाता रहा है|
हम जिस हवा में हम सांस ले रहे है उसमे कार्बनडाईऔक्साइड ,कार्बन मोनोक्साइड
सल्फर डाईऔक्साइड,सीसा कैडमियम, क्लोरिन इत्यादि
की मात्रा कई शहर में तो अपने निर्धारित मापदंड की सीमारेखा भी लाँघ कर कई गुना ऊपर तक पहुँच चुकी है |
यानि यहाँ की हवा साँस लेने योग्य नहीं रह गयी है |
इसी तरह रंग-रोगन ,चमडा,दवाई और रासायनिक उद्दयोगों ने अपने प्रदूषित बयर्थ पानी से, पानी के स्त्रोतों को भयंकर रूप से विषाक्त कर दिया है |
और अब तो यह भी खबर मिल रही है की जिन कीटनाशकों को हम अपने घर,खेत-खलिहान में मक्खी -मच्छरों ,चूहों,काक्रोच और फसली कीटों पर छिडकते है , वह वर्षा के द्वारा इन पानी के स्त्रोतों तक पहुंचकर आखिर हमें ही ज्यादा नुकसान पहुंचाने लगे है |
जिन डिब्बा-बंद और प्रक्रिया वाले खाद्य पदार्थों को हम चटकारे ले-ले कर बड़े चाव से खाते है ,वह भी हमारे सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक है |
क्यूंकि उनको तैयार करते समय ज्यादा आकर्षक ,स्वादिष्ट,सुगन्धित और खराब होने से बचाने के लिए अनेक प्रकार के विषाक्त रासायन मिलाये जाते है |
जैसे की आम, संतरा,अनानास,लीची,आदि फलों या जूसों को डिब्बा बंद करते समय उनमे बेन्जोइक एसिड मिलाया जाता है |
यह इतना तेज एसिड होता है की अगर एक बूंद नर्म त्वचा पर पर जाय तो फफोले उभर आते है |
इसी तरह से डिब्बा बंद जूसों,शर्बतो,जैम,सॉस आदि में सोडियम बेन्जोइक भी आमतौर पर मिलाया जाता है |
यह इतना तीब्र है की इसकी 2 ग्राम की मात्र एक ब्यास्क कुत्ते की जान लेने के लिए काफी है |
डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों को ख़राब होने से बचाने के लिए उनमे फिटकरी,मग्निसियम क्लोराइड ,कैल्सियम नाइट्रेट जैसे रसायनों का उपयोग भी किया जाता है |
यह रसायन अपने विषाक्त प्रभाव से अंतड़ियां में जख्म और छेद तक कर देते है |
इनके नियमित सेवन से मसूड़े सूज जाते है ,गुर्दे पूरी तरह से ख़राब हो सकते है और शारीर में कैंसर की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है |
लेकिन खेद तो इस बात का है जो खाद्य पदार्थ हमारे लिए जीने के लिए अपितु स्वास्थ्य के लिए बेहद जरुरी है ( हरी-साग सब्जियों,फल,दूध,दही,अंडे ) आदि भी अब धीरे-धीरे कीट और खरपत बार नाशक दवाओं के अँधा धुन्ध छिडकाव से अत्यंत विषैले और शारीर व स्वास्थ्य के लिए घातक बनते जा रहे है |
दरअसल यह जहर हमारे शारीर के अन्दर यकृत,ह्रदय और मस्तिस्क सम्बंधित रोगों को तो जन्म देते ही है |
घातक कैंसर की संभावना को भी बढ़ा देते है |
एक बात और पता चली है की कीट नाशकों की उपस्थति केवल जानवरों से प्राप्त दुध तक सिमित नहीं है | यह माताओं के दूध में भी खतरनाक सीमा से 3 से 4 गुना तक ज्यादा पायी गई है |
खाद्य पदार्थ में बढ़ रही इन कीट नाशक दवाई के पीछे कई कारण है |
इनमे प्रमुख कारण है अधिकांस किसान को न तो कीटनाशक के दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी है और न ही इसके उपयोग के बारे में ठीक से जानते है |
जबकि इनसे जुड़े कंपनी किसान को अधिकाधिक प्रोयोग करने के लिए उत्साहित करती है |
ऐसे स्थिति में रास्ट्रीय जागरूकता ही इस खामोश हत्यारे से जीवन को सुरक्षित रख सकती है |
एक बेहद जरूरी बात यह भी है की अगर हम दिल्ली में रहते है तो हम साँस लेने के लिए शिमला या कश्मीर तो रोज नहीं जा सकते है |
हमारी मजबूरी है की हमें यहीं का प्रदूषित वातावरण में जीना पडेगा | खाना भी जो हमें यहीं का खाना पडेगा |
दुःख तो जब होता है जब सब्जी वाले अपनी रेडी लेकर जमुना की प्रदूषित पानी में रोज सब्जी को साफ़ करते देखे जाते है |
अब उन्हें कौन समझाई ,भाई ये सब्जी तुम साफ़ कर रहे हो या और उसे विषाक्त |
रोज सब्जी वाले हरी सब्जी को गाय और भैंस की तरह माँज-माँज के चमकाने की कोशिस करते है |
मतलब जमुना का पानी बिलकुल किसी भी तरह से आम आदमी के रसोई के काम का नहीं है |
ऐसा हम नहीं सरकारी तंत्र और उनसे सल्गन जो संस्था है उनकी रिपोर्ट है |
पर कोई बात नहीं हम अपने आप को प्राकृतिक पोषण से इस तरह के दुष्प्रभाव से बच सकते है |
हमने कई बार अपने विश्व प्रसिद्ध एलो वेरा जेल के बारे में बात कर चुके है |
वास्तविकता यह है की हमें आजकल के प्रदूषित वातावरण में अगर शारीर को स्वास्थ्य रखना है |
तो एलो वेरा जेल जो शारीर के शुद्धिकरण और अन्दर से जहर को बाहर निकालने का एक मात्र कारगर उपाय है |
और फिर इसके बाद किसी भी प्रकार के रासायनिक दुष्प्रभाव से आपके शारीर पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ सकता है |
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बजट महापर्व संसद के पटल पर रखा गया |
हमेशा की तरह इस बार भी नए लुभावने लोक कल्याणकारी योजनाएं लोगों के लिए पेश किये गये |
पर आम आदमी अब बजट के सुनहरे सपनो पर भरोसा नहीं करते |
चुकी सरकार बजट के नाम पर बड़ी बड़ी घोषणाएं करती है |
लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी जनता यदि पानी ,बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुबिधाएं से बंचित रहे तो सरकारी बजट पर घोषणाएं बैमानी और उसपर सवाल उठना स्वाभाविक है |
देश की 65 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर आश्रित है |
हमारी कृषि की सबसे बड़ी समस्या है ,किसानो को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाना |
खाद्यान्न पदार्थ की मूल्यों में वृद्धि भी किसानो के बजाय ये सटोरियों या ब्यापारी उठाते है |
गरीब किसानो के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं किया है ?
जहां पर किसानो के कंधे पर हमारी देश की १२० करोड़ लोगों को आहार पूर्ति करने की जिम्मेद्दारी है |
उनकी हालात सुधारें बिना सम्पूर्ण विकाश का सपना पूरा नहीं हो सकता है |
हमारे यहाँ आनाज लगभग 22 करोड़ टन उत्पादन होता है जबकि पडोसी देश चाइना में 55 करोड़ टन है |
कृषि की पैदावार बढाए बगैर हम विकाश की गति को तेजी नहीं ला सकते |
आर्थिक सुधार के जिन योजना के तहत सरकार समाज के मानवीय चेहरा दिखाना चाहती है उसके लिए वर्तमान नीतिओं में भारी फेर-बदल की गुंजाइश है |
अपितु वास्तविकता यह है की योजना आयोग ने कभी भी राष्ट्रिय आर्थिक विकास और विभिन्न वर्गों के आर्थिक विकाश को ध्यान में रखकर निति बनाई ही नहीं है |
इसीलिए यहाँ करोडपति की संख्या 70 हजार से भी ज्यादा है और अरबपति 311 है , जिनके पास कुल 3 लाख 64 हजार करोड़ की सम्पति है |
राजस्व संग्रह में भ्रष्टाचार को समाप्त किये बिना राजस्व घाटा कम नहीं होगा |
जो बिक्री या आय कर सरकारी राजकोष में जाना चाहिए वह भरष्ट बाबु की जेब में चला जाता है |
आज केवल 10 प्रतिशत वर्ग को ध्यान में रखकर बजट का रूप रेखा तैयार की जाती है |
120 करोड़ के इस देश में 3 लाख सालाना वेतन पाने वाले कितने लोग होंगे ?
जिनको आयकर में छुट मिलेगी |
पर रातों रात डीजल और पेट्रोल में दाम बढ़ाकर इस से ज्याद आम आदमी से वसूलने की तयारी कर ली है |
मजदुर ,आम आदमी ,छोटे किसान जो कमरतोड़ महगाई का सामना कर रहे थे |
उसके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया, उलटा लगता है डीजल और पेट्रोल की रातों रात दाम बढ़ाकर,खाद्यान्न पदार्थ के दामों में और भी वृद्धि होगी |
मतलब महगाई पर नकेल कसने की उम्मीद लगाईं जनता का आक्रोस और भी बढ़ा दिया है |
महगाई सुरसा जैसी राक्षसी की तरह अपना मुह फाड़े खड़ी है |
नित्य प्रतिदिन देश के गरीब जनता उनके शिकार हो रहे है |
सरकार पंगु की तरह मूक दर्शक है |
बेहाल लोगों की हाल पर सिर्फ और सिर्फ अपनी मजबूरी का रोना रोने का अलावा कुछ नहीं करते दिखाई दे रही है |
वो कहाबत है न "सर मुड़ाते ओले पड़े" ,बजट ने चरितार्थ कर दिखाया है |
"एक दिन हमारे आसू हमसे पूछ बैठे,हमे रोज़ -रोज़ क्यों बुलाते हो,
हमने कहा ---- -याद तो हम कभी नहीं करते ,पर बेबक्त तुम क्यों चले आते हो |"
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ताऊ .इन

मनुष्य की रक्त धमनियों के अन्दर वाली झिल्ली एन्डोथिलियम कहलाती है |
यह शारीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि है जिसका कुल वजन 2 किलोग्राम है |
एन्डोथिलियम रक्त धमनियों में दो तरह के स्त्राव पैदा करती है |
पहला एन्डोथिलियम डेराइवड रिलोक्सिंग फेक्टर ------
यह नाइट्रिक ऑक्साइड पैदा करता है ,जो की ह्रदय की धमनी को फैलाता है |
दूसरा एन्डोथिलियम डेराइवड कान्ट्रेकटिंग फेक्टर का रिसाव पैदा होता है |
यह एन्डोथिलियम 1,2,3 व एन्जियोटेनीसन -II पैदा करते है जो कि ह्रदय की धमनी को सिकोड़ता है |
एन्डोथिलियम के ये सामान्य कार्य उच्च रक्त चाप ,मधुमेह
खून में अत्यधिक चर्बी का होना
एवं धुम्रपान की उपस्थति में सुचारू रूप से नहीं हो सकते है तथा
नाइट्रिक ऑक्साइड कम मात्रा में एवं एन्डोथिलियम -II व एन्जियोटेनीसन-II प्रचुर मात्रा में पैदा करती है जिससे की ह्रदय की धमनी बन्द हो जाती है
तथा ह्रदय घात की स्थिति पैदा हो जाती है |
एन्डोथिलियम की अनियमितता को छोटे उम्र में ही रोका जाना चाहिए
क्यूंकि खून कि नालियों में चर्वी जमाव छोटी उम्र में ही आरम्भ हो जाता है |
जिससे कि अत्यधिक महँगी व जोखिम पूर्ण एन्जियोप्लास्टी एवं बाइपास सर्जरी के मरीजों की संख्या घटाई जा सके | 
ह्रदय की मांसपेशियों को कम रक्त पहुँचने या बिलकुल भी रक्त न पहुँचने की वजह से दिल का दौरा पड़ता है |
आमतौर पर दिल के दर्द में , छाती में बेचैनी ,पसीने का होना |
बिना दर्द के भी दिल का दौरा पड़ सकता है |
या फिर ब्यक्ति को हलकी सी थकावट ,छाती में जलन एवं पेट में बेचैनी महसूस हो सकती है |
दिल का दर्द कभी एक स्थान पर सिमित नहीं होता |
यदि कोई दर्द को सिर्फ छाती पर दर्शाए ,तो उसे दिल का दर्द नहीं हो सकता |
दर्द आता और जाता रहे ,तो भी ये दिल का दर्द नहीं हो सकता है
ह्रदय के दौरे के वजह से होने वाला दर्द आमतौर पर 20 मिनट से भी ज्यादा समय तक रहता है |
ऐसा अक्सर सुबह-सुबह ही देखा जाता है | 
ह्रदय का दौरा एवं अचानक मौत दोनों ही जल्द सुबह 2 घंटे एवं ठंढे मौसम में ज्यादा होती है |
इसलिए छाती का दर्द जो सुबह -सुबह हो,उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए |
सुबह के 2 घंटे में रक्तचाप भी बढ़ा हुआ रहता है |
इसमें सिर्फ ह्रदय के दौरे का ही नहीं ,बल्कि लकवे
एवं दिमाग की नस फटने (ब्रेन हम्रेज ) का ख़तरा भी काफी अधिक रहता है |
अक्सर ह्रदय के धड़कन रुकने के पीछे कोई कारण जरूर होता है |
कुछ लोग थकावट वाला शारीरिक श्रम जैसे की ज्यादा खाने के बाद डांस करना
कार को धक्का लगाना,बलपूर्वक दरवाजा बंद करना इत्यादि हो सकते है |
कई बार भावनात्मक कारण भी हार्ट अटैक का कारण होता है |
सिगरेट पीने वाले ब्यक्ति भी दिल का दौरा पड़ने पर अचानक मौत का शिकार हो जाते है
ऐसा अक्सर जवान ब्यक्तियों में ज्यादा देखने को मिलता है |
ह्रदय का दौरे को रोकने का तरिका है ------------बचाव एवं नियमित जांच ( मधुमेह, कोलेस्ट्रोल इत्यादि )
एलो वेरा जेल के साथ में अगर प्रभावित ब्यक्ति आर्टिक - सी का सेवन करता है
तो निश्चय ही ह्रदय से सम्बन्धित किसी भी प्रकार के समस्या से बचा जा सकता है |
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हजारों साल पहले मानव जाती पहाड़ के कंदराओं में रहा करते थे |
अपने आहार के लिए वे लोग जंगली जानवर के शिकार पर ज्यादा निर्भर रहा करते थे |
उनका जीवन ज्यादा कठिन और संघर्षपूर्ण था |
इतिहास पुरुष कहे जाने वाले वो लोग दिनचर्या के
आहार और कार्य कलाप के लिए निरंतर प्रयासरत रहा करते थे |
दरअसल भविष्य का कोई अविष्कार नहीं होता ,
वो तो जो आप प्रतिदिन कार्य अच्छे या बुरे करते है उससे भविष्य का निर्माण होता है |
दूसरी बात ,तनाव का मुख्य कारण उस समय यह था
की शिकार के बक्त खुद भी जानबरों का शिकार ना हो जाए |
हिमयुग के मनुष्य की दिनचर्या के अनुसार ऐसा लगता है कि वे लोग बड़े मस्त और मनमौजी थे |
उनका जीवन दिलचस्प था |
हो सकता है ऐसा भी हो लेकिन एक विकार से वे भी पीड़ित थे ,जिसका नाम है,तनाव |
माना जाता है कि तनाव का इतिहास मानव जीवन के इतिहास से जुडा हुआ है |
भले ही कारण बदलते रहे हों लेकिन तनाव जैसा तेजी से फैलता-फूलता विकार और कोई नहीं है |
जहां पहले कुछेक कारण से यह होता था, वहीँ आज अनेकानेक कारण है |
वर्तमान का हर मनुष्य तनावग्रस्त जीवन जी रहा है |
आज के आधुनिक युग में भी लोग भिन्न -भिन्न प्रकार के समस्याओं के वजह से लोग तनावग्रस्त है |
चाह कर भी लोग पूरी तरह से मुक्ति नहीं पा सकता |
मसलन महानगर जैसे शहर में आज ज्यादातर लोग अकेला परिवार में रहता है |
कुछ साल पहले तक लोग ज्यादातर संयुक्त परिवार में रहा करते थे
जिसके कारण थोड़ी बहूत तनाव कम हुआ करता था |
अगर कुछ परेशानीयां आती ,तो लोग मिल बांटकर उसको निबटा लेते |
कमरतोड़ महगाई और उपरी आडम्बर इतना ज्यादा है
की दो वक़्त की रोटी के लिए दोनों मियां बीबी को काम करने के बाबजूद
उनका निर्वाह बड़ी मुश्किल से हो पाता है |
किसीको नौकरी नहीं है तो वो इसके लिए तनाव में है
तो कोई नौकरी करते हुए अपने कार्य क्षेत्र में बढ़ता दबाब से तनावग्रस्त है |
किसीके के पास पैसा नहीं है इसीलिए ,तो कोई ज्यादा पैसे के वजह से तनावग्रस्त है |
किसीको बच्चे नहीं है इसिलए ,तो कोई अपने बच्चे के वजह से तनावग्रस्त है |
कोई अपनी या अपने परिजन की सेहत को लेकर तनावग्रस्त है
तो कोई ब्यापारिक मसलों पर |
कोई जीवनजापन के लिए तो कोई अपनी महत्वाकांक्षाओं की तुष्टि के लिए
है सभी तनावग्रस्त |
मसलन आज के समय में लोग किसी न किसी वजह से जरूर तनावग्रस्त देखे जा रहे है |
अब आपको तनाव तथा उनके द्वारा होने वाला दुस्प्रभाव को दूर करने के लिए
जिसके कारण अल्सर,अस्थमा,अनियमित धड़कन,ह्रदय का जोरों से धडकना
उच्च रक्तचाप ,कब्ज़,दस्त,चिडचिडापन और हाथ पैरों का ठंढा होना जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है |
फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट का विश्वस्तरीय शुद्ध एलो वेरा जेल और साथ में कुछ पौष्टिक पूरक लेकर इस तरह के तनाव और उनके कुप्रभावों से अपने आपको सुरक्षित रख सकते है |
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दिहाड़ी मजदूरी करने वाली एक औरत ,एक माँ की ये लघु कहानी है |
आजकल के समाज में अक्सर देखा गया है कुछ निठल्ले ब्यक्ति होते है |
जो काम के नाम पर घर में बैठ कर ताश खेलना ,बेकार के काम लगा रहना |
सबसे अहम् बात यह भी है की अगर आप उनसे कोई काम की बात करें ,
तो वो इतना ब्यस्त होते है की समय बिलकुल नहीं होता
ऐसे बिना काम के ब्यस्त रहने वाले लोगों के पास |
और ऐसे लोगों से दुनिया भरी पड़ी है |
कुछ ऐसा ही घटना जो मेरे मानस पटल पर चित्रित हो रहा है ,आज आपके समक्ष रख रहा हूँ |
दिन भर कमरतोड़ मेहनत करने के बाद घर में घुसते ही
निठल्ले बैठे उनके पति कहते है ---अरे सुनो आज दिहाड़ी तो मिल ही गया होगा,
चल जल्दी से बीस रुपैये का नोट निकाल , इंतज़ार में मैं कब से बैठा पडा हूँ
मालूम है न कई दिन हो गए कंठ सुख रहा है |
अध्धा या पौआ कुछ तो ले आऊं, बेचैन हो रहा हूँ |
पत्नी के कान में जैसे ही ये आवाज आई, वो बुदबुदाने लगी और बोली ---
निठल्ला खुद तो दिन भर कुछ करता नहीं है और आ गया मांगने |
और फिर बोल पड़ी-------- नहीं है मेरे पास रुपैये तुम्हे देने के लिए |
इतना सुनते ही पतिदेव का पौरुष शक्ति जाग पड़ी और फिर से जोर से चिल्लाकर बोला--------
अरे सुनाई नहीं दिया तुम्हे ----जल्दी निकाल वर्ना ??
पत्नी फिर से बोल पड़ी--------बोली न नहीं है मेरे पास |
इसके बाद वो गुस्सा से आगबबुला होकर वो सामने आकर बोला-------------
देख चुपचाप रुपैये निकाल ----वरना घुस्सा मरकर अधमरा कर डालूँगा -----
दिमाग मत ख़राब कर मेरा-------अब जल्दी निकाल------|
चल बीस नहीं तो दस ही निकाल |इतने में ही काम चला लूंगा |
पत्नी बोली-------- नहीं है मेरे पास दस रुपैये |
इतना सुनते ही घुस्से और लात अपनी पत्नी पर बरसाने लगा
और रात भर वो मर्दांगी अपने दिन भर की मेहनत करके आई पत्नी पर दिखाता रहा |
सुबह हुई उनके घर में एक छोटा सा बच्चा
जो डरा सहमा हुआ माँ की गोद में आया और बोला-----------
माँ---माँ -- आज फिर मेरी स्कुल में पिटाई होगी
क्यूंकि किताब के लिए रुपैये नहीं होगा देने के लिए |
कल ही मैडम ने रुपैये लेकर आने के लिए बोला -------नहीं तो पिटाई की बात कही है |
माँ ने बेटा को बड़े प्यार से अश्रु आँख में लिए-------
और खुश होकर बोली------ बेटा तुम्हारी स्कुल में मार न खानी पड़े
इसलिए तो मैं सारी रात तेरे बात से मार खाती रही |
फिर ब्लाउज से बीस रुपैये निकालकर ----- अपने बेटे को दिए |
बच्चे ने अपनी माँ की ओर देखा और गले लगा लिया |
ऐसे होते है भारत जैसे विशाल देश की विशाल ह्रदय वाली माँ |
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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

कष्टदायी प्रसव पीड़ा , मातृत्व स्नेह के लिए
सिर्फ और सिर्फ माँ ही कर सकती है |
अपनी शरीर के लहू से हमें सींचती ,
वगैर कोई परवाह किए ,
आने वाले संतान के
सुख पर सब कुछ न्योछावर
सिर्फ और सिर्फ माँ ही कर सकती है |
निस्वार्थ प्रेम निर्मल ममता
विराट ह्रदय ,सुख समृधि बरसाती
देवी स्वरूपा , ज्ञानमयी ,पवित्रता के प्रतीक
गुलाब की पंखुड़ियों की तरह
कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कराती
आँचल में समेटकर ,रात को लोरी सुनाती
सिर्फ और सिर्फ माँ ही कर सकती है |
आँखों में शीतलता ,चेहरे में गंभीरता
ह्रदय में सहिष्णुता ,बातों में मधुरता
आँचल जैसे सम्पूर्ण आकाश की छत्रछाया
माँ श्रृष्टि का एक मात्र सच ,जो इश्वर के समकक्ष है |
इश्वर तो अदृश्य है पर माँ मानस पटल पर सदा बिचरण करती है
वो मानो ह्रदय में निवास करती है |
संकट से परे ,वो अपने हित की नहीं
अपने लाडले के भविष्य की सोचती
ऐसा सिर्फ और सिर्फ माँ ही कर सकती है |
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जातीय भावनाओं का दोहन
ताऊ .इन

आथ्राईटीस ( Arthritis )
आज के घटते पौष्टिक आहार और बढ़ते डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ का सेवन से हमारे जीवन में एक भयंकर कष्टदायक रोग बनकर उभरता हुआ एक नाम है |
आज कल तो यह एक आम बिमारी है जो शरीर के जोड़ों को प्रभावित करती है |
पहले तो यह बिमारी 55 से 60 साल के बिच में हुआ करता था ,
पर आजकल सामान्यतः 40 से 45 साल के उम्र में ही जोड़ों के दर्द होने लगती है |
इनके मुख्य कारण है शरीर में एसिड का मात्रा बढ़ जाना | दुसरे शब्द में अगर हम कहें तो आथ्राईटीस का मतलब है जोड़ों में सुजन | ये दो तरह के होते है -- ऑस्टियो आथ्राईटीस ( Osteo Arthritis ) और रयूमेटाइड आथ्राईटीस (Rheumatoid Arthritis )|
शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना ही इनका प्रमुख कारण होता है |
शरीर में इसके बढ़ने में सालों साल लग जाते है |
जबतक अल्कलीज खान -पान शरीर में यूरिक एसिड को प्रभावी होने नहीं देते है तबतक तो कोई बात नहीं ,
पर किसी कारणबश शरीर में यूरिक एसिड अतिरिक्त बनने लगते है तो अंत में यह जोड़ों के बिच में जाकर हड्डियों या पेशियों पर इकठ्ठा होना शुरू जो जता है ,तो मस्क्युलर आथ्राईटीस के रूप में जाना जाता है |
आथ्राईटीस और रयूमेटीज्म ये दोनों ही अपने आप में बहूत ही तकलीफदेह और कष्टदायक बिमारी है |
इनमे मरीज की हालात इतना पीड़ादायक हो सकती है की वो चलने फिरने में भी असमर्थ हो सकता है |
अक्सरहाँ इससे प्रभावित ब्यक्ति को शरीर के हरेक जोड़ों में दर्द महसूर होता है |
कलाइयाँ,अंगुलियाँ,पैरों और टखनों के जोड़ , कूल्हों एवं कंधों के जोड़ इत्यादि सभी आथ्राईटीस के वजह से होता है | महिलाओं में यह पुरुषों के अपेक्षा तीन गुना ज्यादा देखा गया है |
कुछ परिवार में यह अनुवांशिक रूप में मिलता है |
जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए हमारे पास है विश्व स्तरीय स्टेबलाईज्द एलो वेरा जेल और साथ में है कुछ पौष्टिक पूरक तत्व है :- अगर कोई ब्यक्ति हमारे इस उत्पाद को इमानदारी और आत्मविश्वास के साथ 6 महीना तक प्रयोग में लाता है तो निश्चित तौर पर आथ्राईटीस से सदा सदा के लिए मुक्ति मिल सकता है |
उत्पाद निम्नलिखित है ( Arthritis ) के लिए :-
1. Aloe Vera Gel :- उद्दीपन रोधी , दर्द में राहत , पीड़ा नाशक , आंत की समस्याओं के लिए |
2. Forever Freedom :- कार्टिलेज का पुनर्निर्माण ,साइनोवायल द्रव का पुनरुत्पादन ,दर्द से राहत
3. Artic Sea - कोशिका झिल्ली को बरकरार रखना ,आवश्यक फैटी एसिदों की आपूर्ति, चर्बी को कम करना |
4. Garlic Thyme :- पाचक ,निरोधी प्रणाली में सुधार ,एंटीबायोटिक , खून को पतला करना |
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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन
विगत कुछ समय से हम सब प्रतिदिन समाचार पत्र और टेलीविजन की सुर्ख़ियों में जगह बना रही |
स्वाइन फ्लू के बढ़ते आतंक की गाथा पढ़ते आ रहे है |
स्वाइन फ्लू आज के समय पुरे संसार में ये अपना जाल फैलाया हुआ है |
सुरुआत अमेरिका से हुई और जबतक वहां के तंत्र इस महामारी के बारे में कुछ जानकारी हासिल कर पाती |
तबतक बहूत सारे ब्यक्ति को वो अपना निवाला बना चूका था |
इस कहर से मरने वालों के संख्या उम्मीद से ज्यादा पहुँच चुकी है |
इसके बाद सारा यूरोप इस बिमारी के प्रकोप से त्राहि -त्राहि कर उठा |
कोई भी देश अछूता नहीं रहा |
प्रत्येक देशों की चिंता सिर्फ यही थी की प्रभावित देशों से जो लोग उनके देश में आयेंगे तो साथ में एन्फ़्लुएन्ज़ा भी लेकर आयेंगे |
जिससे हम भी मुश्किल में पड़ जायेंगे |
यहाँ पर भी कोई शंका नहीं है चुकी हम देशवासी भी आतंक की आशंका से चिंतित हो उठे थे |
हमारा देश भारत भी इस महामारी के चपेट से नहीं बच सका
और न जाने कितने लोग इस फ्लू नामक बीमारी के कारण मर गए
और आगे का पता नहीं| ये बिमारी है ही इतना भयाबह की अगर सही समय पर इसका सही इलाज नहीं किया गया
तो वो जानलेबा भी साबित हो सकती है, इसलिए ये फ्लू वायरस ने सबकी नींद उड़ा दी है |
यह एक श्वसन तंत्र के द्वारा जुड़ी हुई एक बिमारी है जो इन्फ्लुएंजा वायरस ए टाइप से होती है |
यह वायरस (H1-N1) नाम से जाना जाता है |
इसे एक प्रकार से मौसमी बिमारी भी कहा जा सकता है |
अक्सरहां ये रोग वर्षा और शरद ऋतू में होता है --- दस्त,जुकाम,सर्दी,बुखार ,खांसी इत्यादि प्रायः अपनी सर उठाने लगती है |
कभी तो अचानक जोरदार वारिस हो जाती है , तो कभी अचानक धुप खिल जाती है |
इस तरह से जमीन में गर्मी तथा वातावरण में नमी आदि के वजह से मौसमी बीमारियाँ उभरने लगती है|
इसके अलावा कारखानों के द्वारा छोड़ा गया रासायन
.वातावरण में उगलती हुई जहरीली व प्रदूषित धुंआ आदि कारणों से सम्पूर्ण विश्व का मौसमी वातावरण बदल गया है ,
फिर इस वातावरण में वायरस का प्रसार होना स्वाभाविक है |
दुसरी ओर बढ़ते तनाव , जनसँख्या और मिलावटी खाद्यपदार्थ हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल असर डालता है |
आधुनिक परिवेश में पाश्चात्य जीवन शैली और अनियमित व स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही
से हमारे आमाशय के पक्वाशय की क्रियाएं बिगड़ी हुई है |
इन्ही सब वजहों से 60 प्रतिशत लोग कब्ज़ और पेट के कई समस्यां से जूझते रहते है |
जिसके कारण न जाने कौन - कौन सी नई - नई बीमारियों,वायरस के उत्पन्न होती है |
पर अब मनुष्य इस तरह के वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं रहा , चुकी इम्यून सिस्टम आज के दौर में स्वस्थ नहीं है |
और इन्ही नई बिमारी के देन है स्वाइन फ्लू |
सबसे पहले फ्लू ,फिर बर्ड फ्लू और अब स्वाइन फ्लू आगे ना जाने और कौन सा फ्लू जन्म लेगा |
इन सब विकारों से बचने का एक मात्र उपाय है ,की आयुर्वेदोक्त जीवनचर्या का पालन किया जाये |
यह ना केवल जीवनस्तर सुधारने के लिए प्रेरित करता है बल्कि शारीर को कैसे स्वस्थ रखें ऐसा उपचार भी सुझाता है ?
औषधियों का महाराजा और मानव जाती के लिए संजीवनी कहे जाने वाला एलो वेरा जेल और साथ में आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने वाला बी -प्रोपोलिस
अगर कोई ब्यक्ति तीन से चार महीना तक सेवन करें तो वो वायरस चाहे कुछ हो,
कितना भी भयाबह हो आपके शारीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत होगी
की स्वाइन फ्लू जैसे जानलेबा वायरस भी आपके शारीर में घुसपैठ नहीं कर सकता |
इसलिए हमें आज के भाग दौर , तनाव और प्रदूषित माहौल में अगर शारीर को स्वास्थ्य रखना है
तो कुछ विशिस्ट तरह का जेल और पौष्टिक पूरक अवश्य लेना चाहिए ताकि आने वाला समस्या को हम आसानी से चुनौती दे सकें |
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