आज के दौर की सबसे बड़ी बिमारी कोढ़ या तपेदिक नहीं है बल्कि अपने को गैर-जरुरी महसूस करने का भाव है!दुःख का असली कारण आत्मा या प्रकृति नहीं,बल्कि मनुष्य की तृष्णा है!

सेहतमंद रहें जीवन शैली में परिवर्तन लाकर



स्वास्थय सेवाओं से जुड़े लोग रोकथाम की चिकित्सा को बढ़ाबा देने का दम भरते है परन्तु इसे आपने कभी गहराई से सोचा है डॉक्टर अपने मरीज को नियमित रूप से अस्पताल आकर मेडिकल चेकअप कराने की सलाह देते है जिससे उनका स्वास्थय ठीक रहें पर वास्तव में इसके पीछे उनका उद्देश्य यह होता है कि इन नियमित जाँच के कारण बीमारी का प्रारम्भिक अवस्था में ही पता लगा कर शीघ्रातिशीघ्र उसका उपचार प्रारम्भ हो सके पर बारीकी से देखा जाए तो वो किस चीज की रोकथाम कर पाते है बीमारी कि नहीं,बीमारी तो हो ही गई अब डॉक्टर आपको मरने नहीं देगा यह तो मृत्यु की रोकथाम हुई निश्चय ही,जितनी जल्दी बीमारी का पता चल जाएगा,उतना ही जल्दी उसपर काबू पाया जा सकेगा परन्तु यहाँ मैं द्रिढ़तापूर्बक यह कहना चाहता हूँ कि डॉक्टर बिरादरी और स्वास्थय सेवाएं सचमुच बीमारी की रोकथाम कर स्वस्थ्य रहने की शिक्षा अपने मरीजों को देने में प्रयासरत नहीं है दरअसल डॉक्टर बिरादरी बीमारियों का उपचार करने में इतनी ब्यस्त है कि उनके पास इतना समय ही नहीं कि वे अपने मरीजों को जीवन शैली में परिवर्तन कर स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए शिक्षित कर सकें
यदि हम किसी ब्यक्ति को ऐसा बना दे कि उसे कोई जानलेवा बीमारी हो ही नहीं,उसके लिए हमें मरीजों को संतुलित आहार,नियमीत शारीरिक मेहनत और उच्च गुणवता के nutrition अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा, तो यही सच्ची रोकथाम वाली चिकित्सा होगी
लगभग सभी डॉक्टर इस बात से सहमत है कि बीमारी होने पर दवाइयां शुरू करने से पहले मरीजों को जीवन शैली और खानपान में सुधार कर ठीक होने की एक इमानदार कोशिश अवश्य की जानी चाहिये पर सच्चाई यह है कि जीवन शैली सुधारने की एक सलाह भर देकर अपने कर्तब्य की इति श्री कर लेते है दरअसल डॉक्टर ये मान बैठते है कि मरीज अपनी जीवन शैली तो सुधारने से रहा,तो ये दवाई का पुर्जा ही इसकी जान बचा सकता है इसलिए डॉक्टर जैसे ही मरीज को बीमारी की पहचान करता है,वह सीधे दवा का पुर्जा लिखने बैठ जाता है


ऐसे भी मरीज होते है जिनकी दशा ज्यादा गंभीर होती है और उन्हें तुरंत दवाइयां देनी पड़ती है पर ऐसे मरीज को भी मौका देता हूँ कि जैसे ही उनकी दशा में सुधार हो, वे अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करें जिससे जल्दी ही उनकी दवाएं कम की जा सकें और एक दिन बिलकुल बंद हो सकें
अनगिनत मेडिकल रिसर्च ने यह सिद्ध कर दिया है कि संतुलित भोजन,नियमित ब्यायाम और nutritional supplements लेकर हम अपने स्वास्थय की रक्षा कर सकते है, इतना ही नहीं ,हम अपने खोई हुई सेहत पुनः प्राप्त कर सकते हैं


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Comments :

3 comments to “सेहतमंद रहें जीवन शैली में परिवर्तन लाकर”

Udan Tashtari said... on 

आभार...

आमीन said... on 

thanks

Ratan Singh Shekhawat said... on 

बहुत ही लाभदायक जानकारी

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