इन दिनों समाचार पत्र और मिडिया वालों की मसाला समाचार से कुपित होकर मैंने आज अपने लेख को राजनीती के तरफ मोड़ा हूँ | यह मेरी ब्याक्तिगत राय जो मेरे मन में उभर कर आया है जो आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ | मैं भाषाबाद और प्रान्तबाद से बढ़कर अपने आपको सर्वप्रथम हिन्दुस्तानी मानता हूँ फिर कोई और राज्य, जिला क़स्बा मोहला |

मर्यादा को तार-तार करती ,मराठा मानुष के हक़ के नाम पर पथभ्रष्ट करती हुई कुछ मुठ्ठी भर राजनेता जो अपने आपको हिन्दुस्तान और संविधान दोनों से उपर समझती है | उनके जहर उगलते भाषा जैसे लगता है मानसिक दिवालिया हो गई है |


जिस तरह से बीते दिनों में उनकी साख महाराष्ट्र और मराठों के बिच गिरी है लगता है बौखला गए है | ओछी राजनीती के साथ वेलगाम जुवान भी उनकी गिरती हुई मानसिकता को दर्शाती है | सरकार और समाज दोनों ही ऐसे राजनीतिज्ञों के लिए जिम्मेदार है |

क्यूँ नहीं कोई ठोस कदम उठाता है की फिर से कोई राजनेता अपनी जहरीली और समाज को तोड़ने जैसे संबाद समाचार पत्र और मीडिया के सामने ना कर सकें | प्रत्येक दिन कोई नई मुद्दा मराठी के नाम पर सड़क और सिनेमा घरों में हंगामा करता है और सरकार मूक दर्शक बनकर तमाशबीन की तरह आनन्द उठाती है |

इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी इस तरह के समाचार को परोसने में आग में घी का काम करती है | उनको तो मसाला चाहिए अपनी चैनल की रेटिंग बढाने के लिए | कोई फर्क नहीं पड़ता इन चैनल वालों को ? जहर उगलती समाचार से लोगों की मस्तिस्क पर चाहे कोई भी प्रभाव डाले ? अरे अगर कोई ब्यक्ति चाहे वो जितने मर्जी श्रेष्ठ और प्रभावशाली हो लोगों के बीच में अलगाव वादी बात करता है ,भडकाव बात करता है तो आप गैरजिम्मेदाराना बात लोगों के सामने क्यूँ परोसते है |

मेरे दृष्टकोण में घृणित समाचार को परोसने के लिए ये समाचार चैनल वाले भी बराबर के जिम्मेदार है | उन्हें वहिष्कार करना चाहिए ऐसे असामाजिक और गैरजिम्मेदार बक्तब्य देने वालों को | इससे ज्यादा खुबसूरत तो हमारे समीर लाल जी का उड़नतस्तरी चैनल है जो वाकई सच को उजागर करती है ना की मसाला बनाकर लोगों के मस्तिस्क के साथ खिलवाड़ |

क्या कोई ब्यक्ति संबिधान से भी बड़ा हो सकता है ? सरकार क्यूँ चुप है ? क्या जब तक कोई बहूत बड़ा हंगामा महारास्ट्र के अंदर ना हो जायेगा तब तक उनकी नींद नहीं खुलेगी ? आखिर क्या मजबूरी है वहां की सरकार को ? सब अपनी अपनी राजनीती रोटी सकने के लिए वहां के जनता को असली मुद्दा से ध्यान भटका कर जहरीली राजनीती करके अपने आपको वहाँ के रहनुमा और उनके हिमायती बने रहना चाहते है |

लोकतंत्र का नित्य प्रतिदिन हत्या हो रही है ,जिसे जो पसंद है वह कर रहा है ,सरकार नाम के कोई चीज है ऐसा नहीं लगता |ऐसे क्या कम तकलीफ है अपने इस देश में | रोज कहीं ना कहीं आतंकबाद अपना सर उठाता रहता है | देश को कमजोर करने वाली ताकत अक्सर इस तरह के मुद्दे में देश को उलझाये रखने की कोशिस करता रहता है ताकि वो अपनी गलत मंसूबा को अमलीजामा वखुबी दे सकें |

अभी जिस तरह से हमारे राजनेता आपस में देशद्रोह जैसे शब्द का प्रयोग कर रहे है जो अलगाव वादी ताकत होगी उनकी आत्मा तृप्त हो रहा होगा और वो जश्न में डूबा होगा, उनकी आत्मा से आवाज आ रही होगी --- लगे रहो ,डंटे रहो ,जब तक सबकुछ क्षीण-भिन्न ना हो जाए |

और वो दिन दूर नहीं जब हमारे देश में पकिस्तान और अमेरिका जैसा आतंकबाद विश्व मानचित्र में हमें दिखाएंगे की वो देखो ----------- तुम्हारा महाराष्ट्र , तुम्हारा राजस्थान, तुम्हारा बिहार, बंगाल |
जब घर के लोग ही आतंक की भाषा बोलने लगे तो बाहर वाले से क्या उम्मीद कर सकता कोई ? समय रहते ही अगर ऐसे कमजोर करने वाली ताकत पर अंकुश नहीं लगाया गया तो एक दिन हमारे पास दो दो हिन्दुस्तान होंगे और ना जाने और भी ज्यादा |

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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन

1 Responses to राजनीती का घिनोना चेहरा |

  1. ये वोट बेंक बनाने की घटिया राजनीती है सरकार भी इन्ही वोटों को खोने के डर से कोई कार्यवाही करने से बचती है इसलिए मेरा तो लोकतंत्र से विश्वास ही उठता जा रहा है |
    टी वी वालों को तो हॉट न्यूज चाहिए उन्हें देश हित से क्या लेना देना ? और उनके इसी कदम का फायदा ये अपराधी टाईप नेता अपनी लोकप्रियता बनाने के लिए उठाते है | मेरे विचार से तोमिडिया को नकारत्मक सुचनाए देने पर खुद ही रोक लगाने की पहल करनी चाहिए | देश के खिलाफ जहर उगलने वालों का यदि मिडिया बहिष्कार करदे दो ये अपने आप चुप होकर बैठ जायेंगे |

     

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