विगत कुछ समय से हम सब प्रतिदिन समाचार पत्र और टेलीविजन की सुर्ख़ियों में जगह बना रही |
स्वाइन फ्लू के बढ़ते आतंक की गाथा पढ़ते आ रहे है |
स्वाइन फ्लू आज के समय पुरे संसार में ये अपना जाल फैलाया हुआ है |
सुरुआत अमेरिका से हुई और जबतक वहां के तंत्र इस महामारी के बारे में कुछ जानकारी हासिल कर पाती |
तबतक बहूत सारे ब्यक्ति को वो अपना निवाला बना चूका था |
इस कहर से मरने वालों के संख्या उम्मीद से ज्यादा पहुँच चुकी है |
इसके बाद सारा यूरोप इस बिमारी के प्रकोप से त्राहि -त्राहि कर उठा |
कोई भी देश अछूता नहीं रहा |
प्रत्येक देशों की चिंता सिर्फ यही थी की प्रभावित देशों से जो लोग उनके देश में आयेंगे तो साथ में एन्फ़्लुएन्ज़ा भी लेकर आयेंगे |
जिससे हम भी मुश्किल में पड़ जायेंगे |
यहाँ पर भी कोई शंका नहीं है चुकी हम देशवासी भी आतंक की आशंका से चिंतित हो उठे थे |
हमारा देश भारत भी इस महामारी के चपेट से नहीं बच सका
और न जाने कितने लोग इस फ्लू नामक बीमारी के कारण मर गए
और आगे का पता नहीं| ये बिमारी है ही इतना भयाबह की अगर सही समय पर इसका सही इलाज नहीं किया गया
तो वो जानलेबा भी साबित हो सकती है, इसलिए ये फ्लू वायरस ने सबकी नींद उड़ा दी है |
यह एक श्वसन तंत्र के द्वारा जुड़ी हुई एक बिमारी है जो इन्फ्लुएंजा वायरस ए टाइप से होती है |
यह वायरस (H1-N1) नाम से जाना जाता है |
इसे एक प्रकार से मौसमी बिमारी भी कहा जा सकता है |
अक्सरहां ये रोग वर्षा और शरद ऋतू में होता है --- दस्त,जुकाम,सर्दी,बुखार ,खांसी इत्यादि प्रायः अपनी सर उठाने लगती है |
कभी तो अचानक जोरदार वारिस हो जाती है , तो कभी अचानक धुप खिल जाती है |
इस तरह से जमीन में गर्मी तथा वातावरण में नमी आदि के वजह से मौसमी बीमारियाँ उभरने लगती है|
इसके अलावा कारखानों के द्वारा छोड़ा गया रासायन
.वातावरण में उगलती हुई जहरीली व प्रदूषित धुंआ आदि कारणों से सम्पूर्ण विश्व का मौसमी वातावरण बदल गया है ,
फिर इस वातावरण में वायरस का प्रसार होना स्वाभाविक है |
दुसरी ओर बढ़ते तनाव , जनसँख्या और मिलावटी खाद्यपदार्थ हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल असर डालता है |
आधुनिक परिवेश में पाश्चात्य जीवन शैली और अनियमित व स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही
से हमारे आमाशय के पक्वाशय की क्रियाएं बिगड़ी हुई है |
इन्ही सब वजहों से 60 प्रतिशत लोग कब्ज़ और पेट के कई समस्यां से जूझते रहते है |
जिसके कारण न जाने कौन - कौन सी नई - नई बीमारियों,वायरस के उत्पन्न होती है |
पर अब मनुष्य इस तरह के वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं रहा , चुकी इम्यून सिस्टम आज के दौर में स्वस्थ नहीं है |
और इन्ही नई बिमारी के देन है स्वाइन फ्लू |
सबसे पहले फ्लू ,फिर बर्ड फ्लू और अब स्वाइन फ्लू आगे ना जाने और कौन सा फ्लू जन्म लेगा |
इन सब विकारों से बचने का एक मात्र उपाय है ,की आयुर्वेदोक्त जीवनचर्या का पालन किया जाये |
यह ना केवल जीवनस्तर सुधारने के लिए प्रेरित करता है बल्कि शारीर को कैसे स्वस्थ रखें ऐसा उपचार भी सुझाता है ?
औषधियों का महाराजा और मानव जाती के लिए संजीवनी कहे जाने वाला एलो वेरा जेल और साथ में आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने वाला बी -प्रोपोलिस
अगर कोई ब्यक्ति तीन से चार महीना तक सेवन करें तो वो वायरस चाहे कुछ हो,
कितना भी भयाबह हो आपके शारीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत होगी
की स्वाइन फ्लू जैसे जानलेबा वायरस भी आपके शारीर में घुसपैठ नहीं कर सकता |
इसलिए हमें आज के भाग दौर , तनाव और प्रदूषित माहौल में अगर शारीर को स्वास्थ्य रखना है
तो कुछ विशिस्ट तरह का जेल और पौष्टिक पूरक अवश्य लेना चाहिए ताकि आने वाला समस्या को हम आसानी से चुनौती दे सकें |
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ज्ञान दर्पण
ताऊ .इन







आभार!
ये भी शानदार जानकारी ! यदि हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा ले तो बिमारियों से छुटकारा पा सकते है |